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Showing posts from May 9, 2021

कोरोना का नतीजा

कोरोना का नतीजा  

⚘गौतम बुद्ध का बनारस में उपदेश⚘

⚘गौतम बुद्ध का बनारस में उपदेश⚘ गौतम बुद्ध  का नाम सिद्धार्थ गौतम  था वो एक राजकुमार थे तथा उनके माता पिता ने उन्हें कभी भी सांसारिकता से अवगत होने ही नहीं दिया वो बचपन से ही सिर्फ सुख का ही अनुभव कर रहे थे उन्हें दुःख और पीड़ा का तनिक भी अंदाजा नहीं था पर जब उन्होंने अपनी शिक्षा प्राप्त कर  ली और उनकी शादी यशोधरा से हो गयी अतः उनका एक पुत्र भी हुआ जिसका नाम राहुल था | एक दिन गौतम बुद्ध बाहर निकले हुए थे तभी उन्होंने एक भिखारी को देखा फिर उन्होंने एक वृद्ध व्यक्ति को देखा जिसको चलने आदि में पीड़ा हो रही थी और फिर बुद्धा ने एक मृत शव को देखा , ये देखने के बाद उन्हें लगा की जो जीवन वो जी रहे थे ये वास्तविकता नहीं है अतः वो सच्चाई  और ज्ञान की खोज में निकल गए पांच साल घूमने पर उन्हें कुछ प्राप्त नहीं हुआ फिर वो बोध गया पहुँचे वंहा उन्होंने पीपल के पेड़ के निचे ध्यान करना शुरु कर  दिया और सात दिनों में उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हो गयी अतः जहाँ उन्होंने ध्यान किया था उस वृक्ष का नाम बोधी वृक्ष पड़  गया |  इसी तरह एक दिन गौतम बुद्ध  अपने ...

मानवता की सिख

मानवता की सिख   एक समय की  बात है दो  कलाकार अपने कला के कारण प्रसिद्ध थे | उनमे में से सहदेव चित्रकार और महेश मूर्तिकार था उन दोनों  की कला इतनी मशहूर थी की लोग दूर दूर से उनके कला को  देखने आते  थे परन्तु वे दोनों हमेशा  एक दूसरे को निचा दिखाने  में लगे रहते थे और हमेशा एक दूसरे को बुराई करते थे |  एक दिन कला आयोजन में उन्हें अपनी कला को प्रस्तुत करने के लिए उन्हें आमंत्रन  मिला वे लोग अपनी अपनी कला को बेहतर ढंग से प्रस्तुत किये अतः जब राजा को सबकी कला देखने के लिए बुलाया गया तो  राजा ने उन दोनों की कला को भी देखा तब उन्होंने उन दोनों को अपने अपने मूर्ति और चित्र को बनाके उन्हें देने को कहा अतः उन दोनों  ने आभार प्रकट किया और चित्र बनाने में लग गए | अगला दिन हुआ राजा का मंत्री उन दोनों के घर गया वो जब सहदेव के घर चित्र लेने गया तो महेश की बुराई करते सुना अतः जब वो महेश के घर मूर्ति लेने गया तब सहदेव की बुराई सुनी मंत्री बहुत मायुश हो गया और राजा के पास दोनों चित्र को दे दिया तथा राजा ने जब मंत्री को मायुश ...

चाय की उत्पत्ति

🍵 चाय की उत्पत्ति 🍵  दो दोस्त दिल्ली के यूनिवर्सिटी में  एक साथ पढ़ा करते थे उनमे से एक दोस्त असम से था उसका नाम प्रंजोल था वही दूसरा वही से था और उसका नाम राजवीर था | गर्मी की छुट्टियाँ शुरू हो गयी थी अतः प्रंजोल अपने घर असम जा रहा था तब राजवीर को भी मन हुआ की वो उसके साथ ही जाये और वहाँ के बारे में जाने , वो लोग सामान रखने में जुट गए और सुबह की ट्रैन से आसाम को  निकल पड़े तथा प्रंजोल ट्रैन में  जासूसी कहानी  पढ़ने में रम गया वंही दूसरे तरफ राजवीर को असम और उससे जुडी बाते जानने की बहुत उत्सुकता हो रही थी , अतः जैसे- जैसे असम नजदीक आ रहा था वैसे वैसे वो और ज्यादा उत्साहित हो रहा था वो बोला देखो चाय की बागान पर प्रंजोल वही पला-बड़ा था तो उसे कोई उत्साह नहीं हुआ फिर राजवीर ने बोला की क्या तुम्हे पता है रोज एक सौ अस्सी करोड़ कप चाय रोजी पी जाती है|  इसपे  प्रांजल ने कहा तुमने तो बहुत जाँच पड़ताल  कर  ली इस पे  राजवीर बोला क्या तुम्हे पता की चाय की उत्पत्ति कैसे हुई प्रांजल ने ना  भरा उसने कहा क...

किसान की बुद्धिमता

  किसान की बुद्धिमता  शोमपुर नामक गाँव में एक रामनाथ नामक किसान रहता था | उसके पास उसकी पैतृक सम्पत्ति में कुछ जमीन उसे मिला था , वो उसमे फसलों को उपजाता था तथा वो खेत  में  अकेले ही काम करता था जिससे उसे बहुत अधिक मेहनत  की आवश्यकता पड़ती थी और तब जा के उसके सारे  फसल तैयार होते थे | किंतु इतनी मेहनत  के बाद भी उसे उतना लाभ नहीं होता था क्युकी जब उसका फसल तैयार हो जाता तब वो उसे सीधा बेच आता था जिससे उसे कम मूल्य मिलता था | हर बार इतनी मेहनत करने के बावजूद उसे उसका उचित लाभ नहीं मिल पा रहा था और वो अपने परिवार की पूरी जरूरत को पूर्ण करने में उतना सक्षम नहीं था हालाँकि वो एक मेहनी व्यक्ति था , ऐसे ही दिन बीत रहा था तथा वो एक चीज़ को समझ पा रहा था की इससे मेरा गुजारा नहीं हो पाएगा अतः मुझे कुछ और करना होगा उसने  देखा की बहुत से लोग बिना फसल बेचे उससे उसका नई वास्तु बनाके बेच रहे थे और उतने मेहनत में वो अच्छा कमाई  कर  रहे थे  , अतः उसने अपने फसल को तैयार होने तक कुछ मशीनों तथा दुकानों से संपर्क किया |  कुछ दिनों में...

डरपोक समुद्री पक्षी

डरपोक समुद्री पक्षी  खुले नीले आसमान के नीचे विशाल समुद्र के पास खड़े एक लम्बी चट्टान के ऊपर समुद्री पक्षी का पूरा परिवार वहां  रहता था | उसमे  समुद्री पक्षी का एक डरपोक  छोटा बच्चा था, क्यूँकि उसके सारे भाई बहन उड़ना सिख चुके थे|  परन्तु वो डर  के मारे उड़ना नहीं सिख पा  रहा  था ,वो सोचता था की अगर वो उड़ने की कोशिश करेगा तो उसके पंख नहीं खुलेंगे और वो निचे गिर जाएगा जिससे उसकी मौत हो जाएगी |  बहुत दिन बीत  गए पर वो उड़ाना नहीं सिख पा  रहा था जिसका परिणाम हुआ की उसके परिवार ने उसे खाना देना बंद कर  दिया और वो भूख से व्याकुल हो रहा था तथा खाना पाने के लिए वो यह दिखा रहा था कि वो बेहोश हो गया है पर किसी ने  उसके तरफ  देखा तक नहीं | सभी जोर जोर से आवाजे निकालते  खुले आसमान में विशाल समुद्र के ऊपर अपने पंख फैलाये उड़ रहे थे  दूसरा दिन हुआ वो एकदम  कमजोर हो गया था यह देखकर उसके माँ ने उसकी मनपसंद मछली को उसके खाने के तरीके के अनुशार खाने लगी ये देखकर डरपोक पक्षी के मुँह में पानी आने लगा लेकिन तभी उसकी माँ उस मछली...

सुनहरी पक्षी

सुनहरी पक्षी रामपुर गाँव में रमेश और गणेश दो भाई रहते थे उन दोनों के पास उनके पिता की बहुत बड़ा  बगीचा उन्हें मिला था| उसमे वो तरह-तरह के सब्जियाँ और फल को उपजाते  तथा उसे बेचते थे परन्तु गणेश ने अपनी आय को और बढ़ाना चाहा तथा वह इसके लिए शहर  काम भी करने लगा और रमेश अपना वही काम करता रहा | एक दिन रमेश की पत्नी गणेश के घर गयी तो गणेश की पत्नी ने उसे एक सोने की बाली दी और बोली  इसे उन्होंने  बनवाया है और उन्होंने कहा की एक बाली आपको भी दे दूँ रमेश की पत्नी झटपट उसे लेकर अपने घर आ गयी और बोली की देखिये आपका भाई कितना पैसा कमा रहा है और एक आप है मैं तो कहती हु वो यहाँ नहीं है उसके हिस्से का बगान बेच दो और बोल देना की तुम यंहा नहीं थे तो वो जमीन जमींदार ने हड़प ली पर रमेश न माना परन्तु हर रोज ये बात रमेश की पत्नी उससे ये सब कहती|  ऐसा ही  चल रहा था की एक दिन खबर मिली की गणेश का एक्सीडेंट हो गया है ये सुनकर सभी वंहा गए पर रमेश और उसकी पत्नी जल्दी आ गए क्युकी उन्होंने कहा की उन्हें बगान भी देखना है और वो वापस आ के गणेश के हिस्से वाली जमी...

वास्तविक पुण्य

वास्तविक पुण्य   एक समय की बात है दो दोस्त थे अतः वो वृद्ध हो चुके थे और तीर्थ यात्रा पर जाने का निर्णय लिया | उन्होंने कुछ पैसे जमा कर  लिए ताकि वो एक साल तक यात्रा आराम से कर  सके , कुछ दिन बाद वो दोनों यात्रा पर निकल गए पांच दिन की यात्रा के बाद वो एक मंदिर में पहुंचे वंहा वो कल तक रुके और भोजन आदि ग्रहण कर विश्राम करने चले गए |  अगले दिन उन्होंने यात्रा पुनः आरम्भ की अतः चलते चलते उन्हें एक आकाल ग्रसित गाँव मिला अतः उन्हें प्यास भी लग गयी थी तत्पश्चात वो एक घर से पानी  का अनुरोध करने लगे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली पर जब वो अंदर गए तो उन्होंने देखा की   पूरा परिवार बेहोस पड़ा हुआ है , वो तुरंत पास पड़े घड़े को उठाये और पानी लेकर आये और उनके मुँह पे छिड़काव किया उन सबको होश  आ गया तभी दूसरे मित्र ने  अपने थैले से कुछ रोटियां और दाल निकाल  के उन्हें दिया उन लोगो ने उसे खाया फिर दोनों में एक दोस्त पास के गाँव जाकर दूध और फल आदि खाद्य वस्तुए खरीद ली हुए उनका ध्यान रखा कुछ दिनों में वो सवस्थ हो गए |  Village अब दोनों दोस्तों न...

पानी का किराया

पानी का किराया    एक राज्य में दो भाई भाई रहते थे , उन दोनों में से बड़ा भाई हमेशा अपने छोटे भाई को परेशान या ठगने के चक्कर में रहता था |  छोटे भाई को एक समस्या थी की उसे पानी भरने के लिए बहुत दूर जाना  पड़ता था इससे उसे बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ता था कभी कभी तो उसे पिने तक का पानी भी नहीं बच  पाता था और जब भी वो अपने बड़े भाई से जल माँगता तो वो उसे मना कर  देता था ,ऐसा ही  चलता रहा बड़े भाई को कुछ पैसो की जरुरत आन पड़ी तभी उसने एक युक्ति निकाली  की क्यों न छोटे भाई को ठगा जाये|  वो अपने छोटे भाई के पास गया और उससे वो कुआँ उसे बेचने का प्रस्ताव दिया ये सुनकर छोटा भाई मन ही  मन प्रसन्न हो गया और मान  गया उसने वो कुआँ खरीद लिया | अगले दिन जब छोटा भाई उस कुएँ से पानी भर ही रहा था की बड़ा भाई वहाँ आकर उसे रोकने लगा जब उसके छोटे भाई ने कारन पूछा तो उसने बताया की उसने सिर्फ कुआँ बेचा था न की पानी यह सुनकर छोटा भाई परेशान  हो गया  और तभी उसने कुए का मुँह बंद कर  दिया इससे उसके बड़े भाई ने उसे ऐसा करने पे राजा से शिकायत करने की ध...

व्यापारी अरविंद

व्यापारी अरविंद  एक  युवा ज्ञानपुर  नामक जगह पर रहता था | वह एक बुद्धिमान व्यक्ति था परंतु उसके घर की आर्थिक स्थिति बहुत ठीक नहीं थी अतः वो एक दिन घर से बाहर कुछ गृह के लिए जरुरी सामान लेने दूसरे शहर जा रहा था दोपहर का समय था उसने महसूस किया की गर्मी बहुत ज्याद हो रही  है और प्यास भी बहुत लग रही है अतः उसने अपने पास रखे जल को पिया परन्तु वह बहुत जल्दी ही समाप्त हो गया तथा वो पानी भी बहुत गर्म हो चूका था और उसने देखा की बहुत से लोग भी प्यासे  थे और अपना कार्य कर  रहे थे और कार्य समाप्ति के बाद घर पे जल पीते  थे और या तो गर्म जल को पीते थे |  वो इस बारे में सोच में लग गया की कैसे इस समस्या का समाधान हो कुछ देर सोचने के बाद उसे विचार आया की क्यों न सरबत का व्यापर शुरू  किया जाए अतः उसने घर जाकर कुछ मटके , चीनी को उधार खरीदा और वंहा उसको ले गया ये देखर आस पास काम करते लोग वंहा पहुंचे और इससे उनके काम करने में और भी फायदा हुआ और अरविन्द को बहुत मुनाफा भी हुआ |  सरबत  कुछ दिन हुआ अरविन्द की सरबत का व्यापर अच्छा चलने लगा और उसने और भी...

वस्तुओ की अपनी अपेक्षा

वस्तुओ की अपनी अपेक्षा  एक वृद्ध  व्यक्ति  था |  उसकी दो  बेटियाँ  थी वह अपनी बेटियों के विवाह के लिए चिंतित रहता था क्यूँकि  उसके पास पर्याप्त धन नहीं था उसके पास जितना धन था उसमे  सिर्फ एक बेटी का ही  विवाह वह कर  सकता था | एक दिन एक रिश्ता  उसकी बेटियों के लिए आया जिसमे उसे एक ही  घर में दोनों की शादी का न्यौता था ,पर उनमे से एक भाई मंदबुद्धि था और उनका कहना था की दूसरे बेटे का शादी  वो अपने पैसो से करेंगे | यह सुनकर वृद्ध व्यक्ति अत्यंत प्रसन  हुआ , किंतु उसकी दोनों बेटियाँ एक दूसरे के बिलकुल अलग थी जहाँ एक बहुत घमंडी थी वही दूसरी बहुत  संस्कारी व सुसील थी परन्तु घमंडी बेटी का रंग थोड़ा साफ था  वही दूसरी का रंग थोड़ा साफ नहीं था | कुछ दिन हुआ लड़के वाले आये उन्हें दोनों पसंद आ गयी तथा साफ रंग वाली की शादी नौकरी वाले से करा दी गयी जिसमे वृद्ध व्यक्ति की सारी  पूंजी लग गयी और दूसरी  लड़की की शादी मंदबुद्धि से हो गयी , शादी के कुछ दिन बाद से ही  शांत  स्वभाव वाली से खूब काम कर...

बुद्धिमान राजकुमार

बुद्धिमान राजकुमार  एक बूढ़ा राजा अपने साम्राज्य के लिए उत्तराधिकारी की तलाश कर रहा था | उसके तीन बेटे थे अतः वो अपने राज्य की बागडौर उसे ही  देना चाहता था जो इसके योग्य हो वो नहीं चाहता था की पुराने परंपरा के अनुसार बड़े बेटे को ही  सत्ता मिले |  एक दिन राजा इसी विषय पर सोच ही  रहे थे की उन्हें एक युक्ति सूझी ,उन्होंने अपने तीनो बेटो को बुलाया और कहा की मैं आज नए राजा का चयन करने वाला हूँ अतः तुम सभी को महल दिया जाएगा जिसे शाम  तक तुम्हे भरना होगा ये कहने के बाद राजा ने  तीनो बेटो को एक एक स्वर्ण असर्फी दे दी और तीनो वंहा से चले  गए |  पहले बेटे ने सोचा की पिताजी सठिया गए है भला एक स्वर्ण असर्फी से पूरा महल कैसे बाहर सकता है ततः वह असर्फी बेवजह खर्च कर  देता है |  दूसरे बेटे ने सोचा की अपने महल में सस्ते कचरे को भर  दूंगा और बचे पैसे से  मुलायम तकिया ले लूंगा |  वही तीसरा बेटा कुछ ऐसा करना चाहता था जिससे पिता की  उम्मीद न टूटे तो उसने अगरबत्ती और दिए खरीद लिए और महल को सुगंध और पवित्र रौशनी से भर दिया ये देख के रा...

कहानी एक निर्माण

कहानी एक निर्माण एक  समय की बात है एक लेखक थे वे एक शहर में रहते थे वो अपने नई कहानी के लिए विचार कर  रहे थे  पर बहुत सोचने के बाद भी उन्हें कोई उचित विचार नहीं आ रहा रहा था उन्होंने बहुत मंथन किया पर कोई लाभ नहीं हुआ |  इसी  तरह दो दिन  बीत जाने पर  भी जब उन्हें कुछ विचार नहीं आया तो वो एक निष्कर्ष पे पहुंचे की कही यात्रा में निकला जाए यह सोचने की  देर थी के उन्होंने झट से एक थर्ड  क्लास डब्बे में एक टिकट ले लिया ट्रैन एक दम  खली था जिससे वो प्रसन हो गए क्योकि उन्हें प्राकृतिक दृश्यों को बारीकी से देखने का मौका मिलेगा और नए विचार आएंगे पर वो अपने नए लेख के बारे में सोच हे रहे थे की एक नवाब साहेब वहाँ  आ गये वो वहाँ  बगल में बैठे कुछ देर हो गया पर उन्होंने बात करने में  कोई उत्साह नहीं दिखाया |  कुछ देर  होने  नवाब साहेब ने दो  खीरे निकाले  और उसको छीलने लगे तथा अपने झोले में से मसाला और नमक निकल ली और पहले उस खीरे को बारीक़ काट दिया और उसमे नमक और मसाले का छिड़काव किया | फिर...