असली अमीर और गरीब रामदास नामक एक व्यक्ति सिहि पुर नामक गांव में रहता था , वह बहुत निर्धन था | उसके पास जीविका चलाने हेतु एक मात्र साधन था लकड़ी बेचना तथा उससे उसे बहुत काम धन प्राप्त होता था इससे उसका परिवार बहुत दुःख से अपना भरण पोषण कर पाता था , किंतु जब भी कोई उनके दरवाजे पर आता तो वो उसे पूरा आदर सत्कार करते थे | इसी तरह समय गुजरा रामदास लकड़ियों के लिए घाटी पे चढ़े वो लकड़ी काट के उसे बांध ही रहे थे की अचानक उन्हें एक रंगबिरंगा सुन्दर लकड़ी दिखाई दिया उसे देखकर उन्होंने उसे उठाया तभी एक आवाज आया जिसमे रामदास को बताया गया की इस लकड़ी से उसका प्रतिदिन का आय उसके जरूरत के अनुशार हो जाएगा अतः अगर वो जिस दिन लालच लाएगा उसी दिन ये निसक्रिय हो जाएगा और हमेशा के लिए विलुप्त हो जाएगा तथा ये उसके अच्छे कर्मो के कारन उसे ये पुरुस्कार मिला ह 'वो घर गया और अपने परिवार को सब बात बताया दिन बिता और रामदास की शैली भी बदली वो धनवान हो गए पर उनके अंदर लालच और नि...
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