असली अमीर और गरीब
रामदास नामक एक व्यक्ति सिहि पुर नामक गांव में रहता था , वह बहुत निर्धन था | उसके पास जीविका चलाने हेतु एक मात्र साधन था लकड़ी बेचना तथा उससे उसे बहुत काम धन प्राप्त होता था इससे उसका परिवार बहुत दुःख से अपना भरण पोषण कर पाता था , किंतु जब भी कोई उनके दरवाजे पर आता तो वो उसे पूरा आदर सत्कार करते थे | इसी तरह समय गुजरा रामदास लकड़ियों के लिए घाटी पे चढ़े वो लकड़ी काट के उसे बांध ही रहे थे की अचानक उन्हें एक रंगबिरंगा सुन्दर लकड़ी दिखाई दिया उसे देखकर उन्होंने उसे उठाया तभी एक आवाज आया जिसमे रामदास को बताया गया की इस लकड़ी से उसका प्रतिदिन का आय उसके जरूरत के अनुशार हो जाएगा अतः अगर वो जिस दिन लालच लाएगा उसी दिन ये निसक्रिय हो जाएगा और हमेशा के लिए विलुप्त हो जाएगा तथा ये उसके अच्छे कर्मो के कारन उसे ये पुरुस्कार मिला ह 'वो घर गया और अपने परिवार को सब बात बताया दिन बिता और रामदास की शैली भी बदली वो धनवान हो गए पर उनके अंदर लालच और निष्ठुरता का वास हो गया और वो ये भूल गए की उन्हें क्या चेतावनी मिली थी सो इस दोष के उत्पन्न होते ही वो लकड़ी विलुप्त हो गयी तथा उनका जीवन दुबारा पहले जैसा हो गया | परन्तु उन्हें अपनी गलती का पछतावा होने लगा था तथा उनसे जितना हो पता वो फिर से दुसरो की मदद पूरी निष्ठा से करने लगे जिसका परिणाम हुआ की उनकी कला में वृद्धि हो गयी और वो लकड़ियाँ काट के उससे उसकी नयी नयी वस्तुएँ बनाकर बेचना शुरू कर दिया जिससे उनका एक व्यापर भी शुरू हो गया और वो जीवन का एक अहम् शिख शिख चुका था की अमीर धन से नहीं कर्मो से तथा दुसरो की मदद करने से बनते हैं |

Very good thinking
ReplyDeleteVery lovely
DeleteThanks and support us
DeleteThis story✌ teaches ☝us that👴
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