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वास्तविक पुण्य

वास्तविक पुण्य  

एक समय की बात है दो दोस्त थे अतः वो वृद्ध हो चुके थे और तीर्थ यात्रा पर जाने का निर्णय लिया | उन्होंने कुछ पैसे जमा कर  लिए ताकि वो एक साल तक यात्रा आराम से कर  सके , कुछ दिन बाद वो दोनों यात्रा पर निकल गए पांच दिन की यात्रा के बाद वो एक मंदिर में पहुंचे वंहा वो कल तक रुके और भोजन आदि ग्रहण कर विश्राम करने चले गए | 



अगले दिन उन्होंने यात्रा पुनः आरम्भ की अतः चलते चलते उन्हें एक आकाल ग्रसित गाँव मिला अतः उन्हें प्यास भी लग गयी थी तत्पश्चात वो एक घर से पानी  का अनुरोध करने लगे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली पर जब वो अंदर गए तो उन्होंने देखा की  पूरा परिवार बेहोस पड़ा हुआ है , वो तुरंत पास पड़े घड़े को उठाये और पानी लेकर आये और उनके मुँह पे छिड़काव किया उन सबको होश  आ गया तभी दूसरे मित्र ने  अपने थैले से कुछ रोटियां और दाल निकाल  के उन्हें दिया उन लोगो ने उसे खाया फिर दोनों में एक दोस्त पास के गाँव जाकर दूध और फल आदि खाद्य वस्तुए खरीद ली हुए उनका ध्यान रखा कुछ दिनों में वो सवस्थ हो गए | 

Village


अब दोनों दोस्तों ने वंहा से जाने का निश्चय किया परन्तु उन्हें पता चला की उनके निर्वाह के लिए उनके पास कुछ नहीं है तब दोनों दोस्तों ने उनके लिए दो  गाय  और एक बैल खरीद के ले आये और वो परिवार फिर से सही दिशा में आ गया , लेकिन अब उनके पास धन शेष नहीं रह गया था की वो आगे की यात्रा प्रारम्भ कर सके सो वे वापस घर की तरफ लौट गए अतः वो दोनों अपने घर पहुँच गए लेकिन कुछ दिन बाद उन्होंने स्वप्न  में  देखा की उन्होंने अपनी यात्रा पूर्ण कर ली है अतः जब उनकी नींद खुली तो वो अभी रास्ते  में ही  थे और उनके साथ अभी कुछ और साथी भी जुड़ गए थे जो उन्ही  के गांव के थे और उनके पास सभी तीर्थ स्थलों की वस्तुए भी थी जो की इन्हे आश्चर्य में डाल  रही थी पर वो दोनों समझ चुके थे की प्रभु ने उनकी श्रद्धा को स्वीकार कर लिया है और उनकी तीर्थ यात्रा सफल हो गयी है अतः उन्हों परमात्मा को नमन किया | 

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English:-

Real merit

Once upon a time there were two friends, so they were old and decided to go on pilgrimage. He deposited some money so that he could travel safely for 1 year, after a few days both of them went on a journey and after five days they reached a temple, where they stayed till yesterday and took food etc. and went to rest. |



The next day, he resumed the journey, so he got a famine-ridden village, so he was thirsty, and after that he started requesting Mani from a house but there was no response but when he went in he saw that the whole family was feeling It is lying, they immediately pick up the pitcher nearby and bring water and sprayed it on their mouths, they are all sensed when the other friend took out some loaves and pulses from their bag and gave them to them, then they ate it and then a friend in both He went to the nearby village and bought food items like milk and fruits and took care of them, in a few days, he became healthy.



Now both the friends decided to leave from there but they came to know that they had nothing for their subsistence, then both friends bought two cows and a bull for them and that family again came in the right direction, But now they had no money left to start the journey ahead, so they went back home, so both of them reached their home but after few days they saw on their dream that they had completed their journey. So when they woke up, they were still on the way and some other companions had joined them, who were from their village and they also had the items of all the pilgrimage sites, which was surprising them, but both of them It was understood that the Lord has accepted his reverence and his pilgrimage has been successful, so he bowed to God.

Comments

  1. "💓Moral of the story"💓
    ##The real 😀happiness😀 is behind the ☝good work👍 without any ✌motive✌##

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